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माँ मनसा पूजा

शिव का सावन

हर हर महादेव ,भोलेनाथ ,शम्भू ,त्रिकाल और त्रिकाल न जाने कितने नामों से लोग भगवान् शिव को  पूजते है जानते है। अभी सावन का महिना चल रहा यानि भगवन शिव का महिना ... शास्त्रों में तथा हिंदुओ के लिये बहुत पावन महिना ‍माना गया है .

भगवान शिव :-

शिव में परस्पर विरोधी भावों का सामंजस्य देखने को मिलता है। शिव के मस्तक पर एक ओर चंद्र है, तो दूसरी ओर महाविषधर सर्प भी उनके गले का हार है। वे अर्धनारीश्वर होते हुए भी कामजित हैं। गृहस्थ होते हुए भी श्मशानवासी, वीतरागी हैं। सौम्य, आशुतोष होते हुए भी भयंकर रुद्र हैं। शिव परिवार भी इससे अछूता नहीं हैं। उनके परिवार में भूत-प्रेत, नंदी, सिंह, सर्प, मयूर व मूषक सभी का समभाव देखने को मिलता है। वे स्वयं द्वंद्वों से रहित सह-अस्तित्व के महान विचार का परिचायक हैं। ऐसे महाकाल शिव की आराधना का महापर्व है शिवरात्रि।
lord shiv

क्यों की जाती है सावन में शिव की पूजा ? :-

इस महीने में शिव जी की पूजा का विशेष महत्व बताया जाता है। कहा जाता है कि सावन की महीने में सोमवार के दिन शिव जी की पूजा करने से शिव जी खुश होते हैं। क्योंकि सोमवार का स्वामी शिव जी हैं। सावन का महीना शिव जी का प्रिय होने की एक वजह यह भी बताई जाती है क्योंकि इस महीने में सबसे ज्यादा वर्षा होती है और अधिक वर्षा शिवजी के गर्म शरीर को ठंडक प्रदान करती है।
वहीं सावन का महीने के बारे में एक पौराणिक कथा भी है, जिसके मुताबिक एक बार सनत कुमारों ने शिवजी से सावन का महीना प्रिय होने के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि देवी सती ने अपने पिता के घर योगशक्ति से शरीर त्याग दिया था। उससे पहले देवी सती में शिव जी को हर जन्म में पति के रूप में पाने का प्रण किया था। सती ने अपने दूसरे जन्म में भगवान शिव जी की खूब पूजा की और सावन के महीने में कठोर व्रत रखा। इस पूजा को देखकर शिवजी खुश हो गए और उनसे विवाह कर लिया। तभी से ये महीना शिव जी के लिए प्रिय हो गया,
वहीं इस महीने के बारे में एक और पौराणिक कथा भी प्रचलित है। कहा जाता है कि सावन के महीने में भगवान शिव जी ने समुद्र मंथन से निकला विष पीकर सृष्टि की रक्षा की थी। यहीं कारण है कि इस महीने को शिव जी का प्रिय महीना माना जाता है

बाबा नगरी देवघर ;-

श्रावण का महिना आते ही हजारों भक्तों की भीड़ बाबा नगरी देवघर में उमड़ जाती है ..ऐसा क्या है वहां चलये जानते है , बैद्यनाथ ज्‍योतिर्लिंग स्थित होने के कारण इस स्‍थान को देवघर नाम मिला है। कहा जाता है कि यहाँ पर आने वालों की सारी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। इस कारण इस लिंग को "कामना लिंग" भी कहा जाता हैं।बैद्यनाथ धाम की पवित्र यात्रा श्रावण मास (जुलाई-अगस्त) में शुरु होती है। सबसे पहले तीर्थ यात्री सुल्तानगंज  में एकत्र होते हैं जहाँ वे अपने-अपने पात्रों में पवित्र गंगाजल भरते हैं। इसके बाद वे गंगाजल  को अपनी-अपनी काँवर में रखकर बैद्यनाथ धाम और बासुकीनाथ की ओर बढ़ते हैं। पवित्र जल लेकर जाते समय इस बात का ध्यान रखा जाता है कि वह पात्र जिसमें जल है, वह कहीं भी भूमि  से न सटे।

कहानी:-

इस लिंग की स्थापना का इतिहास  यह है कि एक बार राक्षसराज रावण ने हिमालय पर जाकर शिवजी की प्रसन्नता के लिये घोर तपस्या  की और अपने सिर काट-काटकर शिवलिंग पर चढ़ाने शुरू कर दिये। एक-एक करके नौ सिर चढ़ाने के बाद दसवाँ सिर भी काटने को ही था कि शिवजी प्रसन्न होकर प्रकट हो गये। उन्होंने उसके दसों सिर ज्यों-के-त्यों कर दिये और उससे वरदान माँगने को कहा। रावण ने लंका में जाकर उस लिंग को स्थापित करने के लिये उसे ले जाने की आज्ञा माँगी। शिवजी ने अनुमति तो दे दी, पर इस चेतावनी के साथ दी कि यदि मार्ग में इसे पृथ्वी  पर रख देगा तो वह वहीं अचल हो जाएगा। अन्ततोगत्वा वही हुआ। रावण शिवलिंग लेकर चला पर मार्ग में एक चिताभूमि आने पर उसे लघुशंका निवृत्ति की आवश्यकता हुई। रावण उस लिंग को एक अहीर को थमा लघुशंका-निवृत्ति करने चला गया। इधर उस अहीर से उसे बहुत अधिक भारी अनुभव कर भूमि पर रख दिया। फिर क्या था, लौटने पर रावण पूरी शक्ति लगाकर भी उसे न उखाड़ सका और निराश होकर मूर्ति पर अपना अँगूठा गड़ाकर लंका को चला गया। इधर ब्रह्मा , विष्णु  आदि देवताओं ने आकर उस शिवलिंग की पूजा की। शिवजी का दर्शन होते ही सभी देवी देवताओं ने शिवलिंग की वहीं उसी स्थान पर प्रतिस्थापना कर दी और शिव-स्तुति करते हुए वापस स्वर्ग को चले गये। जनश्रुति व लोक-मान्यता के अनुसार यह वैद्यनाथ-ज्योतिर्लिग मनोवांछित फल देने वाला है।

50 साल बाद बन रहा ऐसा सावन संयोग ..:-

20 जुलाई को बुधवार के दिन ही सावन का आगमन प्रतिपदा तिथि और उत्तर आषाढ़ नक्षत्र में होगा.
- सावन का पहला सोमवार: सावन का पहला सोमवार 25 जुलाई को है और यह धृति योग में आएगा. इस दिन शिव की अराधना करने पर जीवन में सभी बाधाएं खत्म होंगी.
- सावन का दूसरा सोमवार: सावन का दूसरा सोमवार एक अगस्त को वज योग में पड़ेगा. इस योग में शिव स्तुति करने से स्वस्थ ठीक रहता है.
- सावन का तीसरा सोमवार: सावन का तीसरा सोमवार आठ अगस्त को साद्य योग में आएगा. इस दिन शिव की पूजा करने से कठिन से कठिन काम भी पूर्ण होंगे.
- सावन का चौथा सोमवार: सावन का चौथा सोमवार 15 अगस्त को आयुष्मान योग में आएगा. इस दिन शिव की अराधना करने वाले जातकों की आयु में वृद्धि होती है.
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  ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
                                            उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥                                                                        

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रावण की पूजा

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