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माँ मनसा पूजा

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गणेश चतुर्थी 2017

-:गणेश चतुर्थी:- नमश्कार दोस्तों ,तो आज के इस आर्टिकल में गणेश चतुर्थी के बारे में बताने जाने वाला हूँ ...आशा है आपलोगों को ये आर्टिकल पसंद आये ...गणेश चतुर्थी हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। यह त्योहार भारत  के विभिन्न भागों में मनाया जाता है किन्तु महाराष्ट्र में बडी़ धूमधाम से मनाया जाता है। पुराणों के अनुसार इसी दिन गणेश का जन्म हुआ था।यह प्राचीन काल से पूरे भारत में हिन्दूओँ के सबसे महत्वपूर्ण देवता, भगवान गणेश जी (जिन्हें हाथी के सिर वाला, विनायक, विघ्नहर्ता, बुद्धि के देवता और प्रारम्भ के देवता आदि के नाम से जाना जाता है) को सम्मानित करने के लिये मनाया जाता है।यह लोगों द्वारा देश के विभिन्न राज्यों जैसे महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और पश्चिमी और दक्षिणी भारत के अन्य भागों सहित बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह 10 दिनों का उत्सव है जो अनंत चतुर्दशी पर समाप्त होता है। यह कई तराई क्षेत्रों नेपाल, बर्मा, थाईलैंड, कनाडा, संयुक्त राज्य अमेरिका, गुयाना, मारीशस, फिजी, सिंगापुर, मलेशिया, इंडोनेशिया, कंबोडिया, न्यूजीलैंड, त्रिनिदाद और टोबैगो आदि में …

हनुमान जी की पूजा में रखे इन 5 बातों का ध्यान

नमस्कार दोस्तों , आज हम राम भक्त हनुमान के बारे में कुछ बातें बताने जा रहा हूँ ....कुछ ऐसे बातें जिन्हें आपलोगों को हनुमान पूजा के दौरान जरूर याद रखना चाहये ..
कुछ विचारों के अनुसार भगवान शिव जी के ११वें रुद्रावतार , सबसे बलवान और बुद्धिमान माने जाते हैं.तो चलये मैं उन पांच बातों को बताता हूँ 

हनुमान जी की पूजा में रखें इन 5 बातों का ध्यान :-
१. हनुमानजी की पूजा में सबसे पहली बात यही ध्यान रखने की है कि स्त्रियों को कभी भी हनुमानजी की पूजा नहीं करनी चाहिए। इसका कारण यह है कि हनुमानजी सीता को माता मानते हैं तथा विश्व की समस्त नारियों में वह माता सीता के ही प्रतिरूप को देखते हैं अतः वे समस्त स्त्री जाति को स्वयं नमन करते हैं। इसी कारण से स्त्रियों के लिए उनकी पूजा निषिद्ध की गई है। यदि स्त्रियां उनकी पूजा करना ही चाहती है तो वे हनुमानजी को पुत्र मानकर (जैसे बालकृष्ण की सेवा की जाती है) उनकी सेवा कर सकती हैं और उन्हें प्रसाद अर्पित कर सकती हैं। २.अगर आपने मांस या मदिरा का सेवन किया हुआ है तो भूल कर भी हनुमानजी की सेवा न करें, न ही उनके मंदिर में प्रवेश करें। हनुमानजी शुद्ध सात्विक विचार प्…

माला जपने का नियम

भारतीय परंपरा में पूजा-पाठ के साथ-साथ तंत्र-मंत्र का भी विशेष महत्व है। यह बात भी सर्वविदित है कि भगवान शिव ही इस तंत्र विद्या के जनक हैं। यही वजह है कि तंत्र साधक शिव को अपने आराध्य देव और उनके शक्ति स्वरूप मां दुर्गा को अपनी माता मानते हैं।भगवान शिव हर मनोकामना पूरी करने में सक्षम हैं, वह भोलेनाथ भी हैं इसलिए उन्हें प्रसन्न करना मुश्किल भी नहीं है। रुद्राक्ष, जिसे स्वयं शिव का अंश माना जाता है, शिव तक पहुंचने का एक सरल साधन है।


माला जपने का नियम :-


मंत्रजपकामूलभावहोताहै- मनन।जिसदेवकामंत्रहैउसदेवकेमननकेलिएसहीतरीकेधर्मग्रंथोंमेंबताएहै।शास्त्रोंकेमुताबिकमंत्रोंकाजपपूरीश्रद्धाऔरआस्थासेकरनाचाहिए।

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एकादशी व्रत और इसके नियम

हिंदू पंचांग  की ग्यारहवी तिथि  को एकादशी कहते हैं। यह तिथि महीने  में दो बार आती है। पूर्णिमा  के बाद और अमावश्या के बाद। पूर्णिमा के बाद आने वाली एकादशी को कृष्णपछ की एकादशी और अमावस्या के बाद आने वाली एकादशी को शुक्लपछ  की एकादशी कहते हैं। इन दोने प्रकार की एकादशियों का भारतीय सनातन संप्रदाय में बहुत महत्त्व है।सभी धर्मों में व्रत-उपवास करने का महत्व बहुत होता है। साथ ही सभी धर्मों के नियम भी अलग-अलग होते हैं। खास कर हिंदू धर्म के अनुसार एकादशी व्रत करने की इच्छा रखने वाले मनुष्य को दशमी के दिन से ही कुछ जरूरी नियम का पालन करना चाहिए
व्रत:- एकादशी व्रत करने की इच्छा रखने वाले मनुष्य को दशमी के दिन से कुछ अनिवार्य नियमों का पालन करना पड़ेगा। इस दिन मांस, प्याज, मसूर की दाल आदि का निषेध वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए। रात्रि को पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए तथा भोग-विलास से दूर रहना चाहिए। एकादशी के दिन प्रात: लकड़ी का दातुन न करें, नींबू, जामुन या आम के पत्ते लेकर चबा लें और उँगली से कंठ साफ कर लें, वृक्ष से पत्ता तोड़ना भी ‍वर्जित है। अत: स्वयं गिरा हुआ पत्ता लेकर सेवन करें। …

शिव का सावन

हर हर महादेव ,भोलेनाथ ,शम्भू ,त्रिकाल और त्रिकाल न जाने कितने नामों से लोग भगवान् शिव को  पूजते है जानते है। अभी सावन का महिना चल रहा यानि भगवन शिव का महिना ... शास्त्रों में तथा हिंदुओ के लिये बहुत पावन महिना ‍माना गया है .

भगवान शिव :-शिव में परस्पर विरोधी भावों का सामंजस्य देखने को मिलता है। शिव के मस्तक पर एक ओर चंद्र है, तो दूसरी ओर महाविषधर सर्प भी उनके गले का हार है। वे अर्धनारीश्वर होते हुए भी कामजित हैं। गृहस्थ होते हुए भी श्मशानवासी, वीतरागी हैं। सौम्य, आशुतोष होते हुए भी भयंकर रुद्र हैं। शिव परिवार भी इससे अछूता नहीं हैं। उनके परिवार में भूत-प्रेत, नंदी, सिंह, सर्प, मयूर व मूषक सभी का समभाव देखने को मिलता है। वे स्वयं द्वंद्वों से रहित सह-अस्तित्व के महान विचार का परिचायक हैं। ऐसे महाकाल शिव की आराधना का महापर्व है शिवरात्रि। क्यों की जाती है सावन में शिव की पूजा ? :- इस महीने में शिव जी की पूजा का विशेष महत्व बताया जाता है। कहा जाता है कि सावन की महीने में सोमवार के दिन शिव जी की पूजा करने से शिव जी खुश होते हैं। क्योंकि सोमवार का स्वामी शिव जी हैं। सावन का महीना शिव जी का …

रावण की पूजा

रावण ,रामायण का एक प्रमुख किरदार जो अपने दसों सिर के लिये जाना जाता है ,रावण को बहुत क्रूर , ,सशक्त खलनायक के रूप में देखते है ,परन्तु आज हम उनके एक प्रतापी राजा और उसके अच्छाई
को आपलोगों के सामने विस्तार से चर्चा करेंगे..
मान्यतानुसार रावण में अनेक गुण भी थे। वह एक कुशल राजनीतिज्ञ , महापराक्रमी , अत्यन्त बलशाली , अनेकों शास्त्रों का ज्ञाता प्रकान्ड विद्वान पंडित एवं महाज्ञानी था। रावण के शासन काल में लंका का वैभव अपने चरम पर था इसलिये उसकी लंकानगरी को सोने की लंका अथवा सोने की नगरी भी कहा जाता है।
रावण मे कितना ही राक्षसत्व क्यों न हो, उसके गुणों विस्मृत नहीं किया जा सकता। ऐसा माना जाता हैं कि रावण शिव भगवान का बड़ा भक्त था। वह महा तेजस्वी, प्रतापी, पराक्रमी, रूपवान तथा विद्वान था।बाल्मीकि  उसके गुणों को निष्पक्षता के साथ स्वीकार करते हुये उसे चारों वेदों का विश्वविख्यात ज्ञाता और महान विद्वान बताते हैं। वे अपने रामायण में हनुमान का रावण के दरबार में प्रवेश के समय लिखते हैं अहो रूपमहो धैर्यमहोत्सवमहो द्युति:।अहो राक्षसराजस्य सर्वलक्षणयुक्तता॥ आगे वे लिखते हैं "रावण को देखते ही रा…